देखो शिक्षा का जूनून....शिक्षक के लिये ग्रामीणों ने पहाड काट बनाया रास्ता...

  देखो शिक्षा का जूनून....

      शिक्षक के लिये ग्रामीणों ने पहाड काट बनाया रास्ता....

यह खबर है २६/०८/२०२३ patrika.com उदयपुर पेज पर छपी है|

कोटड़ा (उदयपुर) :शिक्षा की भूख क्या होती है, इसकी मिसाल उदयपुर जिले के आदिवासी बहुल कोटड़ा उपखंड के खुणा ग्राम पंचायत में देखने को मिली है। यहां पीपली खेत गांव के ग्रामीणों और बच्चों ने 50 दिन की कड़ी मेहनत से शिक्षकों के लिए पहाड़ी काटकर रास्ता बना दिया। दरअसल शिक्षक को स्कूल पहुंचने में दो बार घुटनों तक पानी में उतरकर नदी पार करनी पड़ती थी। 
इसके बाद 6 किमी उबड़ खाबड़ पहाड़ी और पगडंडियों के सहारे पैदल सफर कर स्कूल जाना पड़ता था। गांव में सरकार ने 2002 में पांचवीं तक स्कूल की शुरुआत की थी। जहां अध्यापन के लिए संविदा पर एक शिक्षा मित्र लगाया ।लेकिन स्कूल में कक्षा कक्ष नहीं होने से बच्चे कभी आते कभी नहीं आते। नदी पार कर स्कूल पहुंचने की मजबूरी टीचर समरथ मीणा ने बताया कि जून 2022 में पहली बार पीपली खेत स्कूल क में ग्रेड थर्ड टीचर की पोस्टिंग मिली। उन्हें नहीं पता था कि स्कूल पहुंचने के लिएउन्हें दो बार सेई नदी पार करनी पड़ेगी। वह जब नदी तक पहुंचे तो वहां घुटने 1 तक पानी था। इसके बाद वह गांव में पहुंचे तो पता चला कि स्कूल तक पहुंचने के लिए भी पहाड़ियों और पगडडियों से होते हुए कच्चा और उबड़ खबड़ रास्ता पार करना है। जैसे तैसे उन्होंने एक साल स्कूल से दूर मांडवा कस्बे में गुजारा। आखिरकार 2023 में उन्होंने सोच लिया था कि यहां से अब ट्रांसफर करवाना है। ग्रामीणों को पता र चला कि समरथ यहां से ट्रांसफर करवा कर रहे हैं तो उनसे रुकने की गुजारिश की ग्रामीणों ने एक बैठक बुलाई, जिसमें समरथ भी थे। ग्रामीणों ने उनसे वादा किया कि वे गांव में ऐसा रास्ता बनाएंगे कि 15 अगस्त को बच्चों के टीचर बाइक पर स्कूल आएंगे। यह प्रेम अमूल्य, अब यहीं रहकर बच्चों को शिक्षा दूंगा टीचर समरथ ने बताया कि मेरे जीवन के ये सबसे संघर्ष भरे दिन थे, पैदल आना जाना और थकान शहर में पढ़ाई की, कभी ऐसी जगह पोस्टिंग । मिलेगी यह नहीं सोचा था। लेकिन, गांव के लोगों ने जो मेरे लिए किया है, वह अमूल्य है। इन्होंने मेरी तकलीफ को समझा और रास्ता बना दिया, इससे बड़ा और क्या हो सकता है। अब मैं यहीं रहकर बच्चों को शिक्षा दूंगा।
  इस खबर को देखते हुए कई आदिवासी क्षेत्र है जहा शिक्षा का स्तर बोहत कम है क्युकी वहा की व्यावस्था स्कूल है मगर वहा पक्की या कच्ची सड़क नही तो कही शिक्षा स्तर अच्छा है मगर शिक्षक ध्यान देते नही|लेकिन जहा बच्चों के शिक्षा के लिए टीचर अपनी जी जान लगाकर बच्चों को पढ़ाते है वैसे क्षेत्रों में ग्रामीणों ने भी ध्यान देना चाहिए जो यह खबर छपी है|क्युकी आनेवाले  कल के भविष्य यही बच्चे है|
     आज के दौर में वैज्ञानिक युग में प्राथमिक शिक्षा का स्तर को बच्चों के लिए महत्व समझा जाता है मगर आज इस स्थर को सरकारी स्कूलों के बजाय प्रायव्हेट स्कूलों को महत्व ज्यादा दिया जाता क्युकी पढ़े लीखे पूंजीपति अपने बच्चों का भविष्य बढ़ाने के लिए सरकारी स्कूलों को महत्व नहीं देते ग्रामीण क्षेत्र हो या शहरों के भू भागों में कई सरकारी स्कूलों को बंद कराया जा रहा क्युकी प्रायव्हेट स्कूलों में बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलती है जो सरकारी प्राथमिक शिक्षा में नही और कहा जाए  सरकारी प्राथमिक शिक्षा में गरीब के बच्चे आम तौर पर पढ़ते|लेकिन फिर भी कई जगह सरकारी स्कूलों में ज्यादा ध्यान नही दिया जाता नाही पढ़ता जाता है और जिस स्कूलों में टीचर पढ़ाते| वहा के टीचर अपने बच्चों को दूसरे प्रायव्हेट स्कूलों में दाखिला करते यह बात सही है|और ग्रामीण पहाड़ी क्षेत्र में स्कूल है मगर वहा जाने के कच्ची या पक्की सड़कें नही इस कारण बच्चों को पढ़ानेवाले टीचर स्कूलों में नही आते|तो कही टीचर आते मगर बच्चों को बाहरी स्कूलों में दाखिला कराते|
  लेकिन जो शिक्षक आनेवाले कल के भविष्य को अच्छे पढ़ाने के लिए अपनी जी जान लगाते बोहत बढ़ा योगदान देते है|वहा का शिक्षा का स्तर बढ़ जाता है|जिस ग्रामीण स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा का स्तर बढ़ाने के शिक्षक मेहनत से पढ़ाते है वैसे टीचर को सहायता करना जरूरी है|

   


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